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ईरानी हमलों पर सऊदी अरब का कड़ा रुख: ‘नहीं छोड़ेंगे’, बढ़ते तनाव से पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

iran की गैस और तेल सुविधाओं पर लगातार हो रहे हमलों से खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, जिससे सऊदी अरब कड़ा रुख अपनाए हुए है। सऊदी अरब ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि ये हमले नहीं रुके, तो वह सैन्य कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटेगा। इस स्थिति ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि ऐसे हालात में उसे भी इस संघर्ष में शामिल होना पड़ सकता है।

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ईरान की सैन्य गतिविधियों ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नौसेना प्रमुख अलिरेजा तंगसीरी ने सऊदी अरब, यूएई और कतर के अहम तेल-गैस ढांचों को लेकर एक असामान्य सार्वजनिक चेतावनी जारी की है। उन्होंने वहां मौजूद नागरिकों और कर्मचारियों से तुरंत इन औद्योगिक स्थलों को खाली करने को कहा, ताकि उनकी सुरक्षा बनी रहे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए तंगसीरी ने संकेत दिया कि ईरान की टारगेट लिस्ट अब अपडेट हो चुकी है और अमेरिका से जुड़े तेल प्रतिष्ठानों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों के बराबर माना जाएगा। इससे साफ है कि अब व्यावसायिक ऊर्जा संसाधन भी संभावित हमलों के दायरे में आ गए हैं।

इस बयान के बाद सऊदी अरब का रुख और सख्त हो गया है। सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने क्षेत्रीय मंत्रियों की बैठक में ईरान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों को रोकना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इन हमलों को ‘ब्लैकमेल’ की कोशिश बताते हुए स्पष्ट किया कि सऊदी अरब अपने पड़ोसी देशों पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं करेगा। प्रिंस फैसल ने साफ शब्दों में कहा कि उनका पूरा ध्यान अपने देश और उन पड़ोसी देशों की सुरक्षा पर है, जो इस संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं।

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सऊदी अरब का सख्त संदेश: ‘हम नहीं झुकेंगे, ईरान को भुगतना पड़ेगा भारी

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक सभी रास्तों का इस्तेमाल करेगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखेगा। सऊदी विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि ईरान बातचीत के बजाय अपने पड़ोसी देशों पर दबाव बनाने की नीति अपनाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह रणनीति सफल नहीं होगी।

सबसे अहम बात यह रही कि प्रिंस फैसल ने साफ कहा कि ईरान पर भरोसा अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। उनके मुताबिक, पड़ोसी देशों पर हुए हमले पहले से योजना बनाकर किए गए थे, जिससे जो थोड़ा बहुत विश्वास बचा था, वह भी पूरी तरह टूट गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि तेहरान इस बैठक के संदेश को समझे, अपनी गलती पर विचार करे और पड़ोसी देशों पर हमले तुरंत बंद करे। साथ ही, उन्होंने ईरान के नागरिक ढांचे पर हमलों को उचित ठहराने के तर्क को भी खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी का हवाला देना बिल्कुल अस्वीकार्य है।

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