मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। Hormuz Strait को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तीखी बयानबाज़ी जारी है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
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ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला करता है, तो Hormuz Strait को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। IRGC के अनुसार, ऐसे हालात में यह मार्ग तब तक नहीं खोला जाएगा, जब तक ईरान के क्षतिग्रस्त पावर प्लांट्स का पुनर्निर्माण नहीं हो जाता।
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा है कि फिलहाल होर्मुज़ स्ट्रेट बंद नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अमेरिका और इसराइल के रवैये के कारण समुद्री जहाज़ इस रास्ते से गुजरने में हिचकिचा रहे हैं।
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इस बीच, 21 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि Hormuz Strait को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के कई पावर प्लांट्स को निशाना बनाकर उन्हें तबाह कर देगा, जिसकी शुरुआत सबसे बड़े प्लांट से होगी।
📌 क्यों अहम है होर्मुज़ स्ट्रेट?
Hormuz Strait ईरान के पास स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है, जिससे इसकी रणनीतिक और आर्थिक महत्वता बहुत ज्यादा है।
⚠️ तेल बाजार पर असर
अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद, ईरान ने इस मार्ग पर कड़ी निगरानी और आंशिक नाकेबंदी जैसी स्थिति बना दी है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज़ स्ट्रेट पूरी तरह बंद होता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, खासकर उन देशों पर जो तेल आयात पर निर्भर हैं, जैसे भारत।