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दिल्ली के मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने 27 अप्रैल 2026 को शराब नीति मामले में एक बड़ा कदम उठाते हुए कोर्ट की सुनवाई का बहिष्कार कर दिया। यह सुनवाई जस्टिस Swarana Kanta Sharma के समक्ष होनी थी।
केजरीवाल ने अदालत में पेश होने के बजाय “गांधीवादी सत्याग्रह” का रास्ता अपनाया। उनके इस फैसले ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
📌 क्यों किया बहिष्कार?
सूत्रों के मुताबिक, केजरीवाल का मानना है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उन्होंने अपने विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज कराने के लिए सत्याग्रह का सहारा लिया, जिसकी अवधारणा Mahatma Gandhi से जुड़ी हुई है।
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⚖️ क्या है शराब नीति केस?
दिल्ली की नई आबकारी (Excise) नीति को लेकर यह मामला सामने आया था, जिसमें कथित अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। बाद में इस नीति को रद्द भी कर दिया गया था।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि नीति के लागू होने में प्रक्रियागत खामियां थीं, जबकि केजरीवाल और उनकी पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
🏛️ कोर्ट की कार्यवाही पर असर
केजरीवाल के इस कदम से कोर्ट की कार्यवाही पर असर पड़ सकता है। अदालत उनकी गैर-हाजिरी को लेकर सख्त रुख अपना सकती है और आगे की सुनवाई में नए निर्देश जारी कर सकती है।
🔍 राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस फैसले को लेकर राजनीति गरमा गई है।
- समर्थकों का कहना है कि यह अन्याय के खिलाफ मजबूत कदम है
- वहीं विपक्ष ने इसे कानून से बचने की कोशिश बताया है
📢 आगे क्या?
अब नजरें अदालत के अगले कदम पर टिकी हैं। संभावना है कि कोर्ट इस मामले में सख्त निर्देश दे सकती है। यह केस आने वाले समय में राजनीति का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।

