अमेरिका-ईरान संघर्ष फिर भड़का, मध्य पूर्व में बढ़ा युद्ध का खतरा
मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। हाल ही में हुए अंतरिम शांति समझौते के बावजूद अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर नए सैन्य हमले किए हैं। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा फिर बढ़ गया है और वैश्विक स्तर पर भी चिंता गहरा गई है।
अमेरिका ने क्यों किया हमला?
अमेरिका के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक तेल टैंकर पर हुए ड्रोन हमले के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में ड्रोन बेस, मिसाइल भंडारण केंद्र, एयर डिफेंस सिस्टम और तटीय रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।
ईरान का जवाबी हमला
अमेरिकी कार्रवाई के कुछ समय बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। दोनों देशों ने बताया कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकांश हमलों को नाकाम कर दिया। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या भारी जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान ने सैन्य कार्रवाई जारी रखी तो अमेरिका “मिशन पूरा करने” के लिए और बड़े कदम उठाएगा। दूसरी ओर, ईरान ने भी चेतावनी दी है कि किसी भी नए हमले का पहले से अधिक कड़ा जवाब दिया जाएगा।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बढ़ा संकट
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। यहां बढ़ते तनाव से वैश्विक तेल आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ने की आशंका है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
दुनिया पर क्या होगा असर?
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है।
- शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
- समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है।
- मध्य पूर्व में सुरक्षा संकट और गहरा सकता है।
- भारत जैसे तेल आयातक देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें आने वाले कुछ दिनों में होने वाली सैन्य और कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हैं।

