Bandar Anzali Attack : अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान भारत, रूस और ईरान के बीच त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके तहत इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) विकसित किया गया। इस परियोजना का मकसद स्वेज नहर को बायपास कर व्यापार को तेज करना है। साथ ही, भारत और रूस ने आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ईरान का बंदर अंजली शहर इस कॉरिडोर का एक अहम केंद्र है, और यहीं पर अमेरिका-इजरायल द्वारा हमला किया गया है।

Bandar Anzali Attack : ईरान में जारी युद्ध ने एक साथ कई देशों के हितों को प्रभावित किया है। अमेरिका और इजरायल की इस कार्रवाई का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है, लेकिन एशिया और अफ्रीका के देशों को इसका अधिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। अरब देशों से लेकर भारत, चीन और रूस तक, सभी पर इस संघर्ष का असर साफ दिख रहा है।
अब यह टकराव भारत के हितों पर भी सीधे असर डाल रहा है। शुरुआत में चाहबहार पोर्ट को निशाना बनाया गया, जहां भारत इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहा है और जिसे सेंट्रल एशिया तक पहुंच का अहम द्वार माना जाता है। इसके बाद ईरान की एक और महत्वपूर्ण पोर्ट सिटी, बंदर-ए-अंजली (बंदर अंजली) पर हवाई हमला किया गया है।
यह शहर भारत और रूस द्वारा विकसित किए जा रहे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का प्रमुख केंद्र है और इस परियोजना की एक अहम कड़ी माना जाता है। इसी शहर के कई हिस्सों को निशाना बनाए जाने से इस कॉरिडोर की योजना पर गंभीर असर पड़ा है।
भारत और रूस ने इस कॉरिडोर के माध्यम से साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर (करीब 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक) तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। हालांकि, अमेरिका और इजरायल की इस कार्रवाई से इस महत्वाकांक्षी योजना को बड़ा झटका लगा है।
वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य भी इस युद्ध से बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जो भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है।
ईरान के बंदरगाह शहर बंदर अंजली पर हुए अमेरिकी-इजरायली मिसाइल हमले ने भारत और रूस के बीच 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य को बड़ा झटका दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस हमले से इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) की विश्वसनीयता और लागत दोनों पर असर पड़ेगा, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
करीब 7,200 किलोमीटर लंबा INSTC मुंबई को सेंट पीटर्सबर्ग से जोड़ता है और स्वेज नहर को बायपास करते हुए एशिया और यूरोप के बीच व्यापार को तेज और किफायती बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। यह कॉरिडोर ईरान के रास्ते समुद्र, रेल और सड़क के मल्टी-मोडल नेटवर्क के जरिए माल ढुलाई का समय 25–30 दिनों से घटाकर करीब 7 दिन तक लाने की क्षमता रखता है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 18 मार्च को हुए हमले में बंदर अंजली के कस्टम हाउस समेत कई महत्वपूर्ण ढांचों को नुकसान पहुंचा है। कैस्पियन सागर के तट पर स्थित यह बंदरगाह रूस और ईरान के बीच व्यापार के लिए एक अहम लॉजिस्टिक हब माना जाता है।
कई देशों पर असर
मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ प्रोफेसर रेनात करामुर्ज़ोव का कहना है कि अब तक सुरक्षित माने जाने वाले इस मार्ग पर जोखिम बढ़ने से बीमा और माल ढुलाई की लागत में तेज उछाल आ सकता है। इसका असर सिर्फ रूस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्य एशिया के वे देश भी प्रभावित होंगे जो इस कॉरिडोर के जरिए अपने व्यापार को बढ़ाने की योजना बना रहे थे।
वहीं, रूसी विश्लेषक सर्गेई स्ट्रोकान ने इस हमले को एक बड़ा झटका बताते हुए कहा कि INSTC भारत और रूस के द्विपक्षीय संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यह कॉरिडोर समय और लागत दोनों में उल्लेखनीय कमी लाकर व्यापार को नई गति देने वाला था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसकी व्यवहार्यता पर सवाल उठने लगे हैं।
इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत कर खाड़ी क्षेत्र के अहम बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और निर्बाध आवाजाही बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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