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Maruti Suzuki Price Hike: अगस्त से महंगी होंगी मारुति की कारें, सभी मॉडल्स के दाम ₹30,000 तक बढ़ेंगे

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी पैसेंजर वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने अपने ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि अगस्त 2026 से उसके सभी मॉडल्स की कीमतों में बढ़ोतरी की जाएगी। अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के अनुसार कारों की कीमत ₹30,000 तक बढ़ सकती है।

कंपनी ने यह जानकारी 21 जुलाई 2026 को शेयर बाजारों को भेजी गई अपनी आधिकारिक रेगुलेटरी फाइलिंग में दी। नई कीमतें अगस्त से प्रभावी होंगी।

बढ़ती लागत बनी वजह

मारुति सुजुकी के अनुसार, वाहन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और अन्य उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कंपनी ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से लागत कम करने के लिए कई प्रयास किए गए, ताकि ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

हालांकि, महंगाई और लगातार बढ़ती इनपुट कॉस्ट के कारण अब कंपनी के लिए कीमतों में संशोधन करना जरूरी हो गया है। इसी वजह से बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाया जाएगा।

दो महीने में दूसरी बार बढ़ेंगे दाम

यह वर्ष 2026 में मारुति सुजुकी की पहली कीमत वृद्धि नहीं है। इससे पहले जून 2026 में भी कंपनी ने अपने विभिन्न मॉडल्स की कीमतों में ₹30,000 तक की बढ़ोतरी की थी। उस समय भी कंपनी ने उत्पादन लागत और महंगाई को इसकी मुख्य वजह बताया था।

अब अगस्त से लागू होने वाली नई बढ़ोतरी जून में हुई मूल्य वृद्धि के अतिरिक्त होगी।

₹3.50 लाख से ₹25 लाख तक का पोर्टफोलियो

Maruti Suzuki Price Hike

मारुति सुजुकी भारतीय बाजार में एंट्री-लेवल हैचबैक से लेकर प्रीमियम एमपीवी तक कई लोकप्रिय मॉडल बेचती है। कंपनी के पोर्टफोलियो में S-Presso, Alto K10, WagonR, Swift, Dzire, Baleno, Brezza, Grand Vitara और प्रीमियम एमपीवी Invicto जैसे वाहन शामिल हैं।

वर्तमान में कंपनी की कारों की एक्स-शोरूम कीमतें लगभग ₹3.50 लाख से शुरू होकर ₹25 लाख तक जाती हैं। नई मूल्य वृद्धि के बाद एंट्री-लेवल और प्रीमियम दोनों श्रेणियों के वाहन महंगे हो जाएंगे।

रेगुलेटरी फाइलिंग क्या होती है?

शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे अपने किसी भी महत्वपूर्ण व्यावसायिक निर्णय, वित्तीय परिणाम, मूल्य संशोधन या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी को SEBI और स्टॉक एक्सचेंज के साथ साझा करें। इस आधिकारिक सूचना को रेगुलेटरी फाइलिंग कहा जाता है।

इनपुट कॉस्ट का क्या मतलब है?

इनपुट कॉस्ट से आशय वाहन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और अन्य उत्पादन खर्च से है। इसमें स्टील, एल्युमिनियम, प्लास्टिक, रबर, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और लॉजिस्टिक्स जैसी लागत शामिल होती है। जब इनकी कीमत बढ़ती है, तो वाहन निर्माण महंगा हो जाता है और कंपनियां अक्सर इसका असर वाहन की कीमतों पर डालती हैं।

ग्राहकों पर क्या होगा असर?

अगस्त 2026 से नई कीमतें लागू होने के बाद मारुति सुजुकी की नई कार खरीदने वाले ग्राहकों को पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी होगी। जिन ग्राहकों ने अभी तक बुकिंग नहीं कराई है, उनके लिए अगस्त से पहले वाहन खरीदना अपेक्षाकृत लाभदायक हो सकता है।

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