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JSSC CGL Cancelled: नौकरी मिलने के बाद क्यों रद्द हुआ रिजल्ट? 2000 अभ्यर्थियों पर संकट

रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने JSSC CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही 2014 से आउटसोर्स एजेंसी TSR Data Processing Pvt Ltd (TDPL) द्वारा कराई गई भर्ती परीक्षाओं, उनके परिणाम और चयन प्रक्रियाओं को भी जांच के दायरे में लिया गया है। इस फैसले के बाद JSSC CGL के जरिए सरकारी नौकरी हासिल कर चुके करीब 2,000 अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

JSSC CGL परीक्षा क्यों रद्द की गई?

झारखंड में पिछले करीब 25 दिनों से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन चल रहा था। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच और विवादित परीक्षाओं को रद्द करना शामिल था।

सरकार के फैसले के बाद JSSC CGL को भी रद्द कर दिया गया। साथ ही TDPL से जुड़ी 2014 के बाद की परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं की व्यापक जांच का आदेश दिया गया है।

ध्यान दें: उपलब्ध रिपोर्टों में अनियमितताओं के आरोपों का जिक्र है। इसका मतलब यह नहीं है कि JSSC CGL से चयनित हर अभ्यर्थी दोषी पाया गया है।


नौकरी मिलने के बाद अभ्यर्थियों की परेशानी क्यों बढ़ी?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास करके सरकारी नौकरी ज्वाइन कर ली, उनका क्या होगा?

रिपोर्टों के अनुसार करीब 2,000 सफल JSSC CGL अभ्यर्थी इस फैसले से प्रभावित हो सकते हैं। इनमें कई उम्मीदवार पहले ही सरकारी पदों पर नियुक्त हो चुके हैं। कुछ अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने दूसरी नौकरियां छोड़कर JSSC CGL के जरिए मिली सरकारी नौकरी ज्वाइन की थी।

अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो दोषी उम्मीदवारों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक साथ प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।


अभ्यर्थियों ने क्या मांग की?

JSSC CGL से चयनित उम्मीदवारों ने सरकार से मुख्य रूप से:

  • परीक्षा रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार करने
  • पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने
  • दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई करने
  • निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों को नौकरी से न हटाने
  • अपनी बात रखने का मौका देने

की मांग की है। कई नियुक्त अभ्यर्थियों ने रांची में विरोध प्रदर्शन भी किया।


सरकार ने क्या फैसला लिया?

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद JSSC CGL को रद्द करने का फैसला सामने आया। सरकार ने 2014 के बाद भर्ती परीक्षाओं में सामने आई शिकायतों और कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच की बात कही है।

सरकार की कार्रवाई सिर्फ JSSC CGL तक सीमित नहीं है। JPSC और आउटसोर्स एजेंसी से जुड़ी कई भर्ती परीक्षाओं की समीक्षा/रद्दीकरण की कार्रवाई भी की गई है। 19 अगस्त को सरकार ने रद्द की गई परीक्षाओं की सूची भी जारी की।


44 भर्ती परीक्षाओं का मामला क्या है?

झारखंड सरकार की कार्रवाई के बाद 44 भर्ती परीक्षाओं की सूची सामने आई है। इनमें JPSC और आउटसोर्स एजेंसी से जुड़ी परीक्षाएं शामिल हैं। JSSC CGL भी इसी व्यापक भर्ती विवाद का हिस्सा है।

कुछ रिपोर्टों में अलग-अलग संख्या—जैसे 22 परीक्षाएं रद्द और 17 में CID जांच—का उल्लेख है। इसलिए DHN Bharat पर संख्या लिखते समय सरकारी notification/list के संदर्भ में इसे स्पष्ट करना बेहतर होगा।


अब 2000 अभ्यर्थियों का क्या होगा?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है।

क्या सभी 2,000 अभ्यर्थियों की नौकरी जाएगी?
इसका अंतिम जवाब अभी सामने नहीं आया है।

चयनित अभ्यर्थी चाहते हैं कि सरकार पहले यह निर्धारित करे कि भर्ती प्रक्रिया में वास्तविक रूप से कहां और किस स्तर पर गड़बड़ी हुई। उनका कहना है कि यदि उन्होंने नियमों के अनुसार परीक्षा पास की और नियुक्ति पाई है तो उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।

इसलिए फिलहाल headline में “2000 की नौकरी गई” लिखना सही नहीं होगा। बेहतर शब्द है:

“2000 अभ्यर्थियों की नौकरी पर संकट/अनिश्चितता”


छात्रों का आंदोलन और तेज हो सकता है

JSSC CGL रद्द होने के बाद एक तरफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है, वहीं दूसरी तरफ पहले से नियुक्त JSSC CGL अभ्यर्थियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

इस तरह सरकार के सामने अब दो अलग-अलग समूहों की मांगें हैं:

छात्र: भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया।
नियुक्त अभ्यर्थी: निर्दोष चयनित उम्मीदवारों की नौकरी सुरक्षित रखने और व्यक्तिगत स्तर पर जांच।

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