पटना | 14 जून 2026 : बिहार पुलिस मद्य निषेध विभाग की भर्ती परीक्षा देने जा रहे हजारों अभ्यर्थियों का गुस्सा रविवार सुबह पटना के पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर हिंसक रूप ले बैठा। ट्रेनों की कमी, देरी और भारी भीड़ के कारण शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते पत्थरबाजी, तोड़फोड़, हवाई फायरिंग और आंसू गैस के गोलों तक पहुंच गया। घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें रेलवे IG जितेंद्र राणा के भी चोटिल होने की खबर है।
क्या-क्या हुआ? (Timeline)
1. रात से ही स्टेशन पर जुटने लगे अभ्यर्थी
- मद्य निषेध विभाग की भर्ती परीक्षा के लिए हजारों छात्र पाटलिपुत्र स्टेशन पहुंचे।
- ट्रेनों की कमी और देरी से छात्रों में परीक्षा छूटने की चिंता बढ़ने लगी।
2. एग्जाम स्पेशल ट्रेन पहुंचते ही मची अफरा-तफरी
- ट्रेन में चढ़ने की होड़ शुरू हो गई।
- कई अभ्यर्थी रेलवे ट्रैक पर उतर गए और ट्रेनों को रोककर प्रदर्शन करने लगे।
3. विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया
- कुछ उपद्रवी तत्वों ने ट्रेन में तोड़फोड़ की।
- रेलवे परिसर में पत्थरबाजी शुरू हो गई।
- पुलिसकर्मी और अधिकारी भी इसकी चपेट में आ गए।
4. पुलिस ने संभाला मोर्चा
- हालात बिगड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।
- भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और हवाई फायरिंग की गई।
- इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में लाई गई।
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घटना के पीछे संभावित कारण
1. पर्याप्त ट्रेन व्यवस्था का अभाव
भर्ती परीक्षा के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आने के बावजूद पर्याप्त ट्रेन व्यवस्था नहीं होने से भारी अव्यवस्था पैदा हुई।
2. ट्रेनों की देरी
कई छात्रों को समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच पाने का डर सताने लगा, जिससे नाराजगी तेजी से बढ़ी।
3. भीड़ प्रबंधन में कमी
एक साथ हजारों अभ्यर्थियों की मौजूदगी और सीमित संसाधनों के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर होती चली गई।
4. असामाजिक तत्वों की भूमिका
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ उपद्रवी तत्वों ने हिंसा और पत्थरबाजी को बढ़ावा दिया, जिससे हालात और बिगड़ गए।
प्रशासन के सामने बड़े सवाल
- क्या भर्ती परीक्षाओं के लिए पहले से पर्याप्त स्पेशल ट्रेनें चलानी चाहिए थीं?
- क्या भीड़ प्रबंधन की तैयारी पर्याप्त थी?
- क्या समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती थी?
- सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर क्या कार्रवाई होगी?
पाटलिपुत्र स्टेशन की यह घटना केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर होने वाली भर्ती परीक्षाओं में परिवहन और भीड़ प्रबंधन की चुनौतियों को भी उजागर करती है। छात्रों की वास्तविक परेशानियों का समाधान प्रशासनिक स्तर पर होना चाहिए, लेकिन हिंसा, पत्थरबाजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।