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FSSAI vs Dabur: ‘100% Pure’ लिखना पड़ा भारी! जानिए क्या है पूरा विवाद और हाईकोर्ट का फैसला

नई दिल्ली: खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापन पर लिखे जाने वाले दावों को लेकर Food Safety and Standards Authority of India यानी FSSAI और बड़ी FMCG कंपनी Dabur India के बीच विवाद सामने आया है। मामला उत्पादों पर इस्तेमाल किए गए “100% Pure”, “100% Natural”, “100% Purity Guaranteed”, “100% Organic” और “100% Tender Coconut Water” जैसे दावों से जुड़ा है।

FSSAI ने इन दावों को लेकर डाबर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए संबंधित खाद्य उत्पादों की बिक्री रोकने का आदेश दिया था। हालांकि, इसके बाद डाबर ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और 7 अगस्त 2026 को कोर्ट ने FSSAI के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।

इस फैसले के बाद अब सवाल यह है कि FSSAI ने डाबर के खिलाफ कार्रवाई क्यों की, किन उत्पादों पर मामला बना और हाईकोर्ट ने कंपनी को क्या राहत दी?


🔴 क्या है पूरा मामला?

FSSAI ने अगस्त 2026 की शुरुआत में डाबर इंडिया के कुछ खाद्य उत्पादों की मार्केटिंग और लेबलिंग पर आपत्ति जताई।

रेगुलेटर के अनुसार, डाबर की वेबसाइट पर कुछ खाद्य उत्पादों के साथ ऐसे “100%” claims इस्तेमाल किए जा रहे थे, जिन्हें FSSAI ने अस्पष्ट, सत्यापन योग्य नहीं और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाला माना।

इनमें “100% Natural”, “100% Pure”, “100% Purity Guaranteed”, “100% Organic” और “100% Tender Coconut Water” जैसे दावे शामिल थे।

FSSAI की कार्रवाई का आधार खाद्य उत्पादों के advertising और claims से जुड़े नियम बताए गए हैं।


🛑 किन Dabur Products पर उठे सवाल?

रिपोर्ट्स के मुताबिक FSSAI की कार्रवाई में कई तरह के खाद्य उत्पादों के claims शामिल थे। इनमें प्रमुख रूप से:

  • Dabur Honey
  • Cow Ghee
  • Virgin Coconut Oil
  • Sesame Oil
  • Coconut Water
  • Coconut Milk
  • Apple Cider Vinegar

जैसे उत्पाद शामिल बताए गए हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि FSSAI की कार्रवाई का मुद्दा इन सभी उत्पादों को असुरक्षित घोषित करना नहीं था, बल्कि मुख्य विवाद उनके लेबल और मार्केटिंग में इस्तेमाल किए गए दावों को लेकर था।

यानी इस खबर को यह कहकर समझना सही नहीं होगा कि “Dabur के सभी उत्पाद खराब हैं” या “Dabur के सभी उत्पादों पर बैन लग गया है।”


🤔 FSSAI को ‘100% Pure’ लिखने पर आपत्ति क्यों है?

किसी खाद्य उत्पाद पर “100% Pure” या “100% Natural” लिखा होने पर ग्राहक उसे उत्पाद की पूर्ण शुद्धता या प्राकृतिक होने की गारंटी के तौर पर समझ सकता है।

FSSAI का तर्क है कि ऐसे absolute claims को स्पष्ट रूप से साबित किया जाना जरूरी है और यदि claim अस्पष्ट या सत्यापित न किया जा सके तो उससे consumer को गलत धारणा हो सकती है।

इसी तरह “100% Organic” जैसे दावे भी सिर्फ marketing language नहीं हैं। Organic food के लिए अलग regulatory framework और certification requirements मौजूद हैं।

FSSAI के Jaivik Bharat portal के अनुसार organic food की पहचान और certification के लिए निर्धारित मानकों का पालन जरूरी है।


🧾 सिर्फ ‘100% Pure’ ही नहीं, Organic Logo को लेकर भी सवाल

इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू Jaivik Bharat logo से जुड़ा बताया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार डाबर के कुछ organic products की labelling में Jaivik Bharat logo के इस्तेमाल को लेकर भी regulatory सवाल उठे।

FSSAI के अनुसार Jaivik Bharat logo organic food की पहचान से जुड़ा है और organic products के लिए निर्धारित certification और regulatory requirements का पालन आवश्यक है।

यही कारण है कि food companies के लिए सिर्फ product बनाना ही पर्याप्त नहीं है। Packaging, claims, certification और advertising language भी regulatory compliance का हिस्सा हैं।


⚖️ फिर दिल्ली हाईकोर्ट क्यों पहुंचा Dabur?

FSSAI के आदेश के बाद डाबर ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।

कंपनी की ओर से यह तर्क दिया गया कि regulator का आदेश उसके व्यापार को प्रभावित करता है और उसके खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उसे पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।

इसके बाद मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में हुई।

7 अगस्त 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने FSSAI के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। इससे डाबर को फिलहाल उन products पर “100%” claims के साथ बिक्री जारी रखने की राहत मिली है, जब तक मामले पर आगे सुनवाई होती है।


🏛️ हाईकोर्ट के फैसले का क्या मतलब है?

यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है।

हाईकोर्ट ने अभी यह अंतिम रूप से नहीं कहा है कि FSSAI की कार्रवाई गलत थी।

कोर्ट का मौजूदा आदेश interim relief/stay है। यानी मामले की अंतिम कानूनी स्थिति अभी तय नहीं हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को निर्धारित है।

इसलिए फिलहाल इसे डाबर की अंतरिम कानूनी राहत के रूप में देखना चाहिए, न कि FSSAI के खिलाफ अंतिम फैसला।


📦 Food Labelling को लेकर क्यों बढ़ रही है सख्ती?

भारत में packaged food का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। ग्राहक उत्पाद खरीदते समय पैकेट पर लिखे शब्दों पर काफी भरोसा करते हैं।

उदाहरण के लिए:

“100% Natural”
“100% Pure”
“Organic”
“Healthy”
“No Added Sugar”
“Natural”

जैसे claims किसी product को दूसरे products की तुलना में ज्यादा आकर्षक बना सकते हैं।

इसी वजह से regulators के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि packaging और advertising में ऐसे दावे न किए जाएं जो consumer को गलत impression दें।

FSSAI पहले भी “100% fruit juice” जैसे claims को लेकर कार्रवाई कर चुका है। जून 2024 में FSSAI ने reconstituted fruit juices के labels और advertisements से “100% fruit juice” claim हटाने का निर्देश दिया था।


👨‍👩‍👧‍👦 Consumers के लिए इसका क्या मतलब?

Dabur-FSSAI विवाद से consumers के लिए भी एक महत्वपूर्ण सीख निकलती है।

किसी product को खरीदते समय सिर्फ सामने लिखे बड़े-बड़े claims देखकर फैसला नहीं करना चाहिए।

खरीदारी से पहले इन चीजों को जरूर देखें:

Ingredients list
उत्पाद में वास्तव में क्या-क्या इस्तेमाल हुआ है, यह देखें।

Nutrition Information
Calories, sugar, fat और दूसरे nutritional details पर नजर डालें।

FSSAI Licence Number
पैकेट पर दिए गए FSSAI details को देखें।

Certification
अगर product organic होने का दावा करता है तो संबंधित certification और logo की जानकारी देखें।

Manufacturing और Expiry Date
Product की date और packaging condition जरूर जांचें।


🔍 क्या अब Dabur के products खरीदना बंद कर देना चाहिए?

इस विवाद के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

FSSAI की कार्रवाई मुख्य रूप से specific claims और labelling practices को लेकर थी। यह कोई blanket declaration नहीं है कि डाबर के सभी खाद्य उत्पाद असुरक्षित हैं।

वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट ने FSSAI के आदेश पर फिलहाल अंतरिम रोक लगाई है। इसलिए मामले की अंतिम स्थिति आगे की न्यायिक सुनवाई के बाद स्पष्ट होगी।

Consumers को किसी भी वायरल पोस्ट या सोशल मीडिया message के आधार पर फैसला लेने के बजाय आधिकारिक जानकारी और product label को देखना चाहिए।


📢 Food Companies के लिए क्या है बड़ा संदेश?

Dabur का मामला सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं रह सकता। यह packaged food industry के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत है।

Food companies को अब अपने:

  • Product labels
  • Advertising claims
  • Website descriptions
  • Social media promotions
  • Organic certifications
  • Nutrition claims
  • Marketing language

की regulatory compliance को गंभीरता से देखना होगा।

क्योंकि आज के दौर में consumer protection सिर्फ product की quality तक सीमित नहीं है। उत्पाद के बारे में consumer को क्या बताया जा रहा है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है।


📌 FSSAI vs Dabur विवाद: 5 बड़ी बातें

1. FSSAI ने Dabur के कुछ food products के “100%” claims पर आपत्ति जताई।

2. “100% Pure”, “100% Natural”, “100% Organic” और “100% Tender Coconut Water” जैसे claims विवाद के केंद्र में रहे।

3. Honey, ghee, coconut oil, coconut water, coconut milk और अन्य products के claims जांच के दायरे में आए।

4. Dabur ने FSSAI के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।

5. 7 अगस्त 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने FSSAI के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। अगली सुनवाई 24 अगस्त को होनी है।


📰 निष्कर्ष

FSSAI vs Dabur विवाद ने भारत में food labelling और marketing claims की बहस को फिर से तेज कर दिया है।

FSSAI का कहना है कि ऐसे “100%” claims consumer को भ्रमित कर सकते हैं, जबकि Dabur ने regulatory order को चुनौती दी है। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल FSSAI के आदेश पर रोक लगाकर कंपनी को अंतरिम राहत दी है।

इस मामले का अंतिम फैसला आने के बाद यह और स्पष्ट होगा कि भारत में food products पर “100% Pure”, “100% Natural” और इस तरह के absolute claims को लेकर regulatory framework किस दिशा में जाता है।

फिलहाल consumers के लिए सबसे जरूरी संदेश यही है—पैकेट पर लिखे marketing claims के साथ-साथ ingredients, nutrition information, certification और licence details भी जरूर पढ़ें।

चिरायता नेपाली- Nepali Chirayta – Chirata

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